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	<title>pmcadmin &#8211; Akhand Bharat News</title>
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	<description>Hindi News, Lifestyle &#38; Entertainment Articles</description>
	<lastBuildDate>Thu, 15 Oct 2026 07:45:10 +0000</lastBuildDate>
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		<title>पाकिस्तानियों से ज्यादा जीते हैं भारतीय; WHO की रिपोर्ट में खुलासा</title>
		<link>https://akhandbharatnews.in/NewsArticle/161730/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pmcadmin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 04 Oct 2026 07:34:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[भारतीय लोगों का औसत जीवन काल पाकिस्तान के लोगों से अधिक है, लेकिन बांग्लादेश, अमेरिका और कनाडा की तुलना में कम है। साल 2023 में भारत में जन्म के समय लाइफ एक्सपेक्टेंसी यानी जीवन प्रत्याशा 71 वर्ष दर्ज की गई। वहीं पाकिस्तान में यह आंकड़ा 68.2 वर्ष, बांग्लादेश में 72.7 वर्ष, अमेरिका में 78.5 वर्ष &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[

भारतीय लोगों का औसत जीवन काल पाकिस्तान के लोगों से अधिक है, लेकिन बांग्लादेश, अमेरिका और कनाडा की तुलना में कम है। साल 2023 में भारत में जन्म के समय लाइफ एक्सपेक्टेंसी यानी जीवन प्रत्याशा 71 वर्ष दर्ज की गई।

 

वहीं पाकिस्तान में यह आंकड़ा 68.2 वर्ष, बांग्लादेश में 72.7 वर्ष, अमेरिका में 78.5 वर्ष और कनाडा में 81.4 वर्ष रहा।

 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, लंबी उम्र का मतलब हमेशा बेहतर और स्वस्थ जीवन नहीं होता। भारत में वर्ष 2023 के दौरान हेल्दी लाइफ एक्सपेक्टेंसी (स्वस्थ जीवन प्रत्याशा) केवल 60.6 वर्ष रही, जो 2019 के 60.5 वर्ष के स्तर से महज थोड़ी ही अधिक है।

 

कोरोना महामारी के दौरान साल 2021 में यह आंकड़ा घटकर 58.4 वर्ष तक पहुंच गया था, जिसमें 2022 में थोड़ा सुधार हुआ और यह 60.2 वर्ष पर लौट आया।

 
<h2 class="wp-block-heading">महामारी के बाद लाइफ एक्सपेक्टेंसी में सुधार</h2>
 

भारत में महामारी के दौरान जीवन काल में आए उतार-चढ़ाव काफी स्पष्ट दिखे। साल 2019 में औसत लाइफ एक्सपेक्टेंसी 70.5 वर्ष थी, जो 2021 में गिरकर 68.1 वर्ष रह गई थी।

 

इसके बाद केवल दो वर्षों के भीतर 2023 तक यह बढ़कर 71 वर्ष पर पहुंच गई, यानी भारत ने इस दौरान अपनी अपेक्षित जीवन काल में 2.9 वर्ष की तेजी से रिकवरी की। इसके विपरीत, स्वस्थ लाइफ एक्सपेक्टेंसी में केवल 2.2 वर्ष की ही बढ़ोतरी दर्ज की गई।

 

यह अंतर बुजुर्गों के आंकड़ों में भी साफ झलकता है। साल 2023 के अनुमान के मुताबिक, 60 वर्ष की आयु पूरी करने वाला एक व्यक्ति आगे लगभग 18.8 वर्ष तक जीवित रहने की उम्मीद कर सकता है, जबकि 2019 में यह आंकड़ा 18.4 वर्ष था। हालांकि, इनमें से केवल 13.7 वर्ष ही पूरी तरह स्वस्थ जीवन के रूप में बिताए जाने की संभावना है।

 
<h2 class="wp-block-heading">संक्रामक रोगों से जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों की ओर बदलाव</h2>
 

भारत में मौतों के प्रमुख कारणों और बीमारियों के पैटर्न में बड़ा बदलाव आया है। वर्ष 2000 में शीर्ष दस प्रमुख कारणों से होने वाली मौतों में टीबी और डायरिया जैसी संक्रामक बीमारियों की हिस्सेदारी 62 प्रतिशत थी, जबकि गैर-संचारी रोग (NCDs) 34 प्रतिशत के लिए जिम्मेदार थे।

 

वर्ष 2023 तक यह स्थिति पूरी तरह बदल गई, जहां गैर-संचारी रोगों की हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 75 प्रतिशत हो गई और संक्रामक बीमारियों की हिस्सेदारी घटकर 16 प्रतिशत रह गई।

 
<h2 class="wp-block-heading">मृत्यु के प्रमुख कारणों में बदलाव</h2>
 

साल 2000 में टीबी और डायरिया देश में होने वाली मौतों के सबसे बड़े कारण थे। 2023 के आंकड़ों के मुताबिक, इस्केमिक हृदय रोग, सीओपीडी यानी फेफड़ों की बीमारी, स्ट्रोक और डायबिटीज सबसे बड़े कारणों में शामिल हो गए हैं।

 

इसके बावजूद टीबी, डायरिया और श्वसन संबंधी संक्रमण आज भी देश में मृत्यु के शीर्ष दस कारणों की सूची में बने हुए हैं।

 

दुनिया भर में भी गैर-संचारी यानी पुरानी बीमारियों के मामलों में भारी बढ़ोतरी हुई है। 2023 में वैश्विक स्तर पर होने वाली कुल मौतों में 74 प्रतिशत मौतें गैर-संचारी रोगों की वजह से हुईं, जबकि 2000 में यह आंकड़ा 58 प्रतिशत था।

 

2023 में दुनिया भर की औसत लाइफ एक्सपेक्टेंसी 73.3 वर्ष रही, जो महामारी से पहले 2019 के 73.4 वर्ष के स्तर के बेहद करीब पहुंच चुकी है।

]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>हेमकुंड साहिब में बर्फबारी से कड़ाके की ठंड, कई जिलों में भारी बारिश का रेड-ऑरेंज अलर्ट</title>
		<link>https://akhandbharatnews.in/NewsArticle/161727/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pmcadmin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 26 Sep 2026 07:32:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
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					<description><![CDATA[उत्तराखंड के हेमकुंड साहिब में मौसम खराब होने के बाद से लगातार बर्फबारी हो रही है। इस बर्फबारी के कारण धाम में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। वहीं, उत्तराखंड में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। मौसम विज्ञान केंद्र ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर 26 से 28 सितंबर तक मानसून गतिविधि की &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">उत्तराखंड के हेमकुंड साहिब में मौसम खराब होने के बाद से लगातार बर्फबारी हो रही है। इस बर्फबारी के कारण धाम में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। वहीं, उत्तराखंड में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। मौसम विज्ञान केंद्र ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर 26 से 28 सितंबर तक मानसून गतिविधि की चेतावनी दी है। विभाग के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. सीएस तोमर ने बताया कि मौजूदा मौसमी प्रणालियों के चलते 26 से 27 सितंबर को पर्वतीय जिलों के कुछ हिस्सों में रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।</p>
<p>&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">वर्तमान विश्लेषण के अनुसार दक्षिण ओडिशा व उससे सटे दक्षिण छत्तीसगढ़ के ऊपर बना अवदाब पिछले छह घंटों में 15 किमी प्रति घंटे की गति से उत्तर-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ा है। 26 सितंबर को बागेश्वर, नैनीताल, पिथौरागढ़, चंपावत व ऊधमसिंह नगर जिले के कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी और कहीं-कहीं अत्यंत भारी वर्षा का रेड अलर्ट जारी किया गया है। देहरादून, पौड़ी, चमोली, रुद्रप्रयाग व अल्मोड़ा में भारी से बहुत भारी वर्षा का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।</p>
<p>&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">27 सितंबर को देहरादून, टिहरी, हरिद्वार व पौड़ी में भारी से बहुत भारी व कहीं-कहीं अत्यंत भारी वर्षा का रेड अलर्ट जारी किया गया है। जबकि नैनीताल, उत्तरकाशी, चमोली व रुद्रप्रयाग में भारी से बहुत भारी वर्षा के साथ 30-40 किमी की हवाएं चलने का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। 28 सितंबर को उत्तरकाशी, हरिद्वार व देहरादून में कहीं-कहीं भारी वर्षा व गर्जन के साथ तीव्र दौर की बारिश होने की संभावना है।</p>
<p>&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>भूस्खलन, फ्लैश फ्लड और सड़कें बंद होने का खतरा </strong></p>
<p>मौसम विभाग ने चेताया है कि संवेदनशील इलाकों में हल्के से मध्यम भूस्खलन, चट्टान गिरने से सड़कें-राजमार्ग अवरुद्ध हो सकते हैं। बिजली-पानी जैसी सामुदायिक सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। इसके अलावा नदियों के जल स्तर में वृद्धि, नालों में अचानक बाढ़, निचले इलाकों में जलभराव, कच्चे मकानों, पुलों व निर्माणाधीन भवनों को नुकसान की आशंका है। चारधाम यात्रा, पर्वतारोहण अभियान व हेली सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। ऐसे में चारधाम व अन्य यात्रा करने वाले तीर्थयात्री-पर्यटक सतर्क रहें, आवश्यक होने पर ही यात्रा करें। नदी, नालों, उफनती धाराओं में तैरने या नौका विहार न करें। भारी बारिश के दौरान घर के अंदर रहें, सक्रिय भूस्खलन क्षेत्र पार न करें।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>दुनिया के टॉप वित्तीय हब में शामिल हो रही गुजरात की &#8216;गिफ्ट सिटी&#8217;</title>
		<link>https://akhandbharatnews.in/NewsArticle/161724/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pmcadmin]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 18 Sep 2026 07:28:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[भारत का ग्लोबल फाइनेंस-टेक हब गिफ्ट सिटी ग्लोबल फाइनेंशियल सेंटर्स इंडेक्स (जीएफसीआई 40) की ताजा रैंकिंग में नौ स्थान आगे बढ़कर 37वें पायदान पर पहुंच गया है। पिछली रैंकिंग (जीएफसीआई 39) में यह 46वें स्थान पर था। गिफ्ट सिटी अब एशिया-पैसिफिक क्षेत्र के टॉप 15 वित्तीय केंद्रों में शामिल हो गया है और इस समूह &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>भारत का ग्लोबल फाइनेंस-टेक हब गिफ्ट सिटी ग्लोबल फाइनेंशियल सेंटर्स इंडेक्स (जीएफसीआई 40) की ताजा रैंकिंग में नौ स्थान आगे बढ़कर 37वें पायदान पर पहुंच गया है। पिछली रैंकिंग (जीएफसीआई 39) में यह 46वें स्थान पर था।</p>
<p>गिफ्ट सिटी अब एशिया-पैसिफिक क्षेत्र के टॉप 15 वित्तीय केंद्रों में शामिल हो गया है और इस समूह में एकमात्र भारतीय केंद्र है। फिनटेक रैंकिंग में भी इसमें सुधार हुआ है। यह तीन स्थान ऊपर चढ़कर वैश्विक स्तर पर 29वें से 26वें स्थान पर आ गया है।</p>
<p>गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी (Gujarat International Finance Tec-City) है, गुजरात में अहमदाबाद और गांधीनगर के बीच साबरमती नदी के तट पर बसाया गया भारत का पहला नियोजित स्मार्ट और ऑपरेशनल फाइनेंशियल शहर है।</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि गिफ्ट सिटी उन 15 केंद्रों में भी शामिल है, जिनके अगले दो-तीन वर्षों में और अधिक महत्वपूर्ण होने की उम्मीद है।</p>
<p>विज्ञप्ति में कहा गया है कि समग्र और फिनटेक रैंकिंग में सुधार, गिफ्ट सिटी के वित्तीय सेवा पारिस्थितिकी तंत्र के निरंतर विस्तार और वित्त, प्रौद्योगिकी और नवाचार के घनिष्ठ एकीकरण को दर्शाता है।</p>
<p>रिपोर्ट में क्लाउड सेवाओं, डेटा कनेक्टिविटी और साइबर सुरक्षा लचीलेपन सहित डिजिटल बुनियादी ढांचे; फिनटेक और डिजिटल परिसंपत्ति व्यवसायों को आकर्षित करना; मजबूत मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी और वित्तीय अपराध ढांचे; और गहन पूंजी बाजारों को अगले पांच वर्षों में वित्तीय केंद्रों के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के रूप में पहचाना गया है।</p>
<p>GIFT City IFSC है, जो विदेशी निवेशकों और वैश्विक वित्तीय संस्थानों को लंदन या सिंगापुर जैसे बड़े वित्तीय केंद्रों जैसी सुविधाएं देता है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पूजा-पाठ में सबसे ज्यादा गेंदे के फूलों का इस्तेमाल क्यों होता है</title>
		<link>https://akhandbharatnews.in/NewsArticle/161720/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pmcadmin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 08 Sep 2026 07:26:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म/अध्यात्म]]></category>
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					<description><![CDATA[आपने अक्सर देखा होगा कि किसी भी पूजा के दौरान सबसे ज्यादा गेंदे के फूलों का ही इस्तेमाल किया जाता है। घर के मंदिर की सजावट से लेकर ईश्वर का आशीर्वाद पाने तक के लिए, इन्हीं फूलों को इस्तेमाल में लाया जाता है। &#160; इसके चमकीले नारंगी और पीले फूलों से भगवान के लिए मालाएं &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">आपने अक्सर देखा होगा कि किसी भी पूजा के दौरान सबसे ज्यादा गेंदे के फूलों का ही इस्तेमाल किया जाता है। घर के मंदिर की सजावट से लेकर ईश्वर का आशीर्वाद पाने तक के लिए, इन्हीं फूलों को इस्तेमाल में लाया जाता है।</p>
<p>&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">इसके चमकीले नारंगी और पीले फूलों से भगवान के लिए मालाएं बनाई जाती हैं, इन्हें मुख्य द्वार पर बंधनवार की तरह सजाया जाता है। यही नहीं मंदिरों में पूजा की दुकानों में भी सबसे ज्यादा मिलने वाला फूल गेंदे का ही होता है।</p>
<p>&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">आप सभी के मन में कभी न कभी यह सवाल जरूर आया होगा कि आखिर क्यों किसी भी पूजा सा सजावट में सबसे ज्यादा इसी फूल का इस्तेमाल होता है? आइए आपको बताते हैं इस सवाल का सही जवाब क्या है।</p>
<p>&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>पूजा-पाठ में गेंदे के फूलों का महत्व</strong></p>
<p>गेंदे का चमकीला रंग पारंपरिक रूप से जीवन में सकारात्मकता, अपनापन और शुभ शुरुआत से जुड़ा माना जाता है। इसके फूल को हमेशा से ही पूर्णता का प्रतीक माना जाता है, जो जीवन में सौभाग्य लाने और ईश्वरीय आशीर्वाद पाने का एक माध्यम माना जाता है।</p>
<p>&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">गेंदे को एक पवित्र फूल भी माना जाता है, क्योंकि यह किसी भी स्थान पर आसानी से मिल जाता है और अन्य फूलों की तुलना में ज्यादा दिनों तक ताजा बना रहता है। यह फूल आसानी में माला में भी पिरोया जा सकता है, जबकि अन्य फूलों की माला से फूल टूटकर गिर जाते हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस फूल का रंग सूर्य की ऊर्जा का भी प्रतीक माना जाता है। इसके साथ ही, गेंदे के फूल कई देवी-देवताओं का प्रिय फूल है और इसे चढ़ाने से वो प्रसन्न होते हैं और घर में खुशहाली आती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>पूजा में सबसे ज्यादा गेंदा फूल क्यों चढ़ाते हैं? </strong>गेंदे के फूल का रंग आमतौर पर पीला या नारंगी होता है जिसे भगवान विष्णु का प्रिय रंग माना जाता है। यदि विष्णु जी की पूजा में गेंदे का फूल चढ़ाया जाता है, तो इससे उनका आशीर्वाद मिलता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इसे गणपति का प्रिय रंग भी माना जाता है, यदि आप भगवान गणेश की पूजा में गेंदे का फूल चढ़ाते हैं, तो उनकी कृपा दृष्टि बनी रहती है। यही नहीं माता पार्वती और लक्ष्मी जी को भी यह फूल अत्यंत प्रिय है, इसलिए देवियों के पूजन में भी गेंदे का फूल चढ़ाने से उनका आशीर्वाद बना रहता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक </strong>गेंदे के फूलों के पीले रंग सूरज का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो भारतीय संस्कृति में शक्ति, प्रकाश और पॉजिटिव एनर्जी का प्रतीक हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ऐसा माना जाता है कि ये फूल पूजा में इस्तेमाल करने से घर में खुशहाली आती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। इसी वजह से गेंदे के फूलों का इस्तेमाल आमतौर पर मंदिरों में और दिवाली, दुर्गा पूजा, गणेश चतुर्थी जैसे त्योहारों के दौरान भी किया जाता है। सभी देवी-देवताओं को ये फूल चढ़ाना भक्ति और पवित्रता का प्रतीक है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>बृहस्पति देव से है संबंध </strong>गेंदे का फूल पीले रंग का होने के कारण इसका सीधा संबंध गुरु बृहस्पति से होता है। इसी वजह से गुरुवार के दिन भगवान विष्णु को पीले गेंदे का फूल चढ़ाने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। गेंदे के फूल का पूजा में प्रयोग करने से ज्ञान और विद्या की प्राप्ति होती है। यही नहीं बसंत पंचमी के दिन गेंदे का फूल माता सरस्वती पर चढ़ाने से ज्ञान और बुद्धि का आशीर्वाद मिलता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">भारतीय पौराणिक कथाओं के अनुसार गेंदे के फूलों को धन और समृद्धि की देवी माता लक्ष्मी से जोड़ा जाता है और इसे सबसे पवित्र फूलों का स्थान मिला हुआ है, इसी वजह से पूजा के समय इन फूलों का इस्तेमाल सबसे ज्यादा किया जाता है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>सीएम रेखा गुप्ता बोलीं-राजधानी में साफ हो रही लैंडफिल साइट्स</title>
		<link>https://akhandbharatnews.in/NewsArticle/161717/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[pmcadmin]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 31 Aug 2026 07:24:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://akhandbharatnews.in/?p=161717</guid>

					<description><![CDATA[राजधानी दिल्ली की लैंडफिल साइट्स को वैज्ञानिक तरीके से साफ किया जा रहा है। इन साइट्स को साफ कर दोबारा उपयोग में लाने की दिशा में लगातार काम चल रहा है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस महत्वपूर्ण पहल के बारे में जानकारी दी। &#160; सीएम रेखा ने बताया कि अब तक ओखला, भलस्वा और गाजीपुर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">राजधानी दिल्ली की लैंडफिल साइट्स को वैज्ञानिक तरीके से साफ किया जा रहा है। इन साइट्स को साफ कर दोबारा उपयोग में लाने की दिशा में लगातार काम चल रहा है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस महत्वपूर्ण पहल के बारे में जानकारी दी।</p>
<p>&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">सीएम रेखा ने बताया कि अब तक ओखला, भलस्वा और गाजीपुर लैंडफिल साइट्स से करीब 85-95 एकड़ जमीन पुनः प्राप्त की जा चुकी है। इस प्रयास से आसपास के इलाकों में पर्यावरण काफी बेहतर हुआ है। साथ ही, स्थानीय लोगों के जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार आया है।</p>
<p>&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">मुख्यमंत्री ने इस कार्य को बीजेपी का कार्य करने का मॉडल बताया है। यह मॉडल आज किए गए वादों को पूरा करने के साथ भविष्य की जरूरतों की भी तैयारी करता है। यह सुनिश्चित करता है कि विकास टिकाऊ और दूरगामी हो।</p>
<p>&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>लैंडफिल साइट्स की सफाई और पर्यावरणीय प्रभाव</strong></p>
<p>लैंडफिल साइट्स की वैज्ञानिक सफाई दिल्ली के लिए एक बड़ी चुनौती थी। इस अभियान से शहर को कचरे के ढेर से मुक्ति मिल रही है। पुनः प्राप्त की गई जमीन का उपयोग हरित क्षेत्रों और अन्य सामुदायिक सुविधाओं के लिए किया जा सकेगा। इन क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर काफी कम हुआ है। इससे वायु गुणवत्ता में सुधार आया है और भूजल भी बेहतर हुआ है।</p>
<p>&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>कचरा प्रबंधन और भविष्य की योजनाएं</strong></p>
<p>इसी कड़ी में दिल्ली में चार नए वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट स्थापित किए जाएंगे। ये प्लांट राजधानी में रोजाना निकलने वाले कचरे के निस्तारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि वैज्ञानिक और टिकाऊ तरीके से कचरा प्रबंधन किया जा रहा है। दिल्ली को स्वच्छ और बेहतर बनाने के लिए लगातार काम जारी है। ये नए प्लांट कचरे से ऊर्जा उत्पादन कर बिजली की जरूरतों को भी पूरा करेंगे।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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