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	<title>पर्यटन &#8211; Akhand Bharat News</title>
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	<description>Hindi News, Lifestyle &#38; Entertainment Articles</description>
	<lastBuildDate>Mon, 11 May 2026 12:31:31 +0000</lastBuildDate>
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		<title>बंद इंजन में भी ऊपर की तरफ खिंचने लगती है गाड़ी! क्या है लद्दाख की ‘मैग्नेटिक हिल’ का रहस्य</title>
		<link>https://akhandbharatnews.in/NewsArticle/160960/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Akhand Bharat News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 11 May 2026 12:31:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पर्यटन]]></category>
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					<description><![CDATA[लद्दाख की ऊबड़-खाबड़ और खूबसूरत पहाड़ियों के बीच, समुद्र तल से लगभग 14,000 फीट की ऊंचाई पर एक ऐसा रहस्य छिपा है, जो ग्रैविटी के नियमों को भी चुनौती देता नजर आता है। लेह-कारगिल-श्रीनगर हाईवे पर स्थित इस जगह को मैग्नेटिक हिल कहते हैं। यहां का नजारा किसी जादू से कम नहीं है, इंजन बंद &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img width="771" height="403" src="https://akhandbharatnews.in/wp-content/uploads/2026/05/6-14.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://akhandbharatnews.in/wp-content/uploads/2026/05/6-14.jpg 771w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/05/6-14-768x401.jpg 768w" sizes="(max-width: 771px) 100vw, 771px"></p>
<p>लद्दाख की ऊबड़-खाबड़ और खूबसूरत पहाड़ियों के बीच, समुद्र तल से लगभग 14,000 फीट की ऊंचाई पर एक ऐसा रहस्य छिपा है, जो ग्रैविटी के नियमों को भी चुनौती देता नजर आता है। लेह-कारगिल-श्रीनगर हाईवे पर स्थित इस जगह को मैग्नेटिक हिल कहते हैं।</p>
<p>यहां का नजारा किसी जादू से कम नहीं है, इंजन बंद होने के बावजूद गाड़ियां अपने आप ढलान से ऊपर की ओर चढ़ने लगती हैं। यह देखकर हर किसी के मन में यही सवाल उठता है कि क्या सच में इस पहाड़ के अंदर कोई विशाल चुंबक छिपा है या फिर यह हमारी आंखों और साइंस का कोई खेल है? आइए जानते हैं इस रहस्यमयी मैग्नेटिक हिल के पीछे की असली सच्चाई।</p>
<p><strong>मैग्नेटिक हिल का जादुई अनुभव<br /></strong>मैग्नेटिक हिल पर प्रशासन ने एक जगह को चिह्नित किया हुआ है। जब पर्यटक अपनी गाड़ी को उस बॉक्स के अंदर न्यूट्रल गियर में खड़ा करते हैं, तो गाड़ी धीरे-धीरे 10 से 20 किमी/घंटा की रफ्तार से ऊपर की ओर बढ़ने लगती है। यह देखकर किसी का भी हैरान होना स्वाभाविक है, क्योंकि ग्रैविटी के नियम के अनुसार चीजों को नीचे की ओर लुढ़कना चाहिए, न कि ऊपर की ओर।</p>
<p><strong>इसके पीछे का असली सच<br /></strong>दरअसल यह कोई जादुई या चुंबकीय शक्ति नहीं है, बल्कि एक ऑप्टिकल इल्यूजन है। इसे दुनिया भर में ग्रेविटी हिल के नाम से भी जाना जाता है।</p>
<p><strong>यह काम कैसे करता है?<br /></strong>इस सड़क के आसपास का भूगोल और ढलान कुछ इस तरह की है कि जो सड़क असल में नीचे की ओर जा रही है, वह देखने में ऊपर की ओर जाती हुई नजर आती है। आसपास की पहाड़ियों का लेआउट और होरिजन न होने के कारण हमारी आंखें भ्रमित हो जाती हैं। हमें लगता है कि गाड़ी ऊपर जा रही है, जबकि असल में वह ग्रैविटी के कारण नीचे की ओर ही लुढ़क रही होती है।</p>
<p><strong>स्थानीय मान्यताएं और लोककथाएं<br /></strong>विज्ञान से परे, लद्दाख के निवासियों के पास इस जगह को लेकर अपनी पुरानी मान्यताएं हैं। स्थानीय लोग मानते हैं कि कभी यहां से स्वर्ग जाने का रास्ता हुआ करता था। उनके अनुसार, यह शक्ति केवल उन लोगों को ऊपर खींचती थी जो इसके योग्य होते थे, जबकि अयोग्य लोग कभी आगे नहीं बढ़ पाते थे। आज भी कई पर्यटक इसे एक आध्यात्मिक अनुभव के रूप में देखते हैं।</p>
<p><strong>घूमने का सबसे अच्छा समय<br /></strong>अगर आप भी इस रहस्य को अपनी आंखों से देखना चाहते हैं, तो मई से सितंबर के बीच यहां जाना सबसे अच्छा है। इस समय मौसम सुहावना होता है और सड़कें पूरी तरह खुली रहती हैं।</p>
</div>
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		<title>कैलाश पर्वत पर आज तक क्यों नहीं चढ़ पाया कोई इंसान?</title>
		<link>https://akhandbharatnews.in/NewsArticle/160822/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Akhand Bharat News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 06 May 2026 12:32:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पर्यटन]]></category>
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					<description><![CDATA[भगवान शिव का निवास स्थान माने जाने वाला कैलाश पर्वत सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे गहरे रहस्यों में से एक है। सोचने वाली बात है कि जिस इंसान ने माउंट एवरेस्ट जैसी दुर्गम चोटी पर हजारों बार कदम रखे हैं, वो उससे 2,000 मीटर छोटे कैलाश पर्वत के सामने क्यों हार &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img loading="lazy" width="906" height="514" src="https://akhandbharatnews.in/wp-content/uploads/2026/05/7-2.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://akhandbharatnews.in/wp-content/uploads/2026/05/7-2.jpg 906w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/05/7-2-768x436.jpg 768w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/05/7-2-390x220.jpg 390w" sizes="auto, (max-width: 906px) 100vw, 906px"></p>
<p>भगवान शिव का निवास स्थान माने जाने वाला कैलाश पर्वत सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे गहरे रहस्यों में से एक है। सोचने वाली बात है कि जिस इंसान ने माउंट एवरेस्ट जैसी दुर्गम चोटी पर हजारों बार कदम रखे हैं, वो उससे 2,000 मीटर छोटे कैलाश पर्वत के सामने क्यों हार मान लेता है?</p>
<p>आखिर इस 6,638 मीटर ऊंचे रहस्यमयी पर्वत पर ऐसा क्या है जो इसे आज तक अजेय बनाए हुए है? इसके पीछे सिर्फ धार्मिक भावनाएं ही नहीं, बल्कि भूगोल से जुड़े भी कई कारण हैं, जो विज्ञान को भी हैरान करते हैं। आइए जानें क्यों आज तक कोई कैलाश पर्वत पर नहीं चढ़ पाया है।</p>
<p><strong>धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक महत्व<br /></strong>कैलाश पर्वत हिंदू, बौद्ध, जैन और बोन धर्म में बेहद पवित्र माना जाता है। हिंदू धर्म में इसे भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है। जैन धर्म के अनुसार पहले तीर्थंकर ऋषभदेव ने यहीं निर्वाण प्राप्त किया था। बौद्ध धर्म में इसे शांति का प्रतीक माना जाता है और बोन धर्म में इसे अध्यात्मिक दुनिया का केंद्र माना जाता है।</p>
<p>इन धर्मों की मान्यता है कि पर्वत पर चढ़ना देवताओं के निवास स्थान का अपमान करना है। इसी कारण चीन सरकार ने इस पर चढ़ाई करने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा रखा है।</p>
<p><strong>भौगोलिक बनावट और मुश्किल रास्ता<br /></strong>कैलाश पर्वत की आकृति एक पिरामिड की तरह है, जिसके चारों मुंह चारों दिशाओं में बिल्कुल सटीक हैं। वैज्ञानिकों के लिए यह आज भी एक पहेली है कि प्राकृतिक रूप से कोई पहाड़ इतना सिमेट्रिकल कैसे हो सकता है। इसके पीछे टैक्टोनिक फोर्सेज और हवा के कटाव को जिम्मेदार माना जाता है।</p>
<p>इसके अलावा, इसकी ढलानें बेहद खड़ी और चट्टानी हैं, जहां बर्फ का टिकना मुश्किल है। लगातार चलने वाली बर्फीली हवाएं और ऑक्सीजन की भारी कमी कैलाश पर्वत की चढ़ाई काफी मुश्किल बनाती हैं।</p>
<p><strong>समय की अजीब गति<br /></strong>कैलाश पर्वत से जुड़ी कई कहानियां भी प्रचलित हैं। कहा जाता है कि इस क्षेत्र में पहुंचते ही समय तेजी से बीतने लगता है। यहां तक कि लोगों के नाखून और बाल कुछ ही घंटों में इतने बढ़ जाते हैं, जितने आमतौर हफ्तों में बढ़ते हैं। ऐसा भी कहा जाता है कि यहां पहुंचने वाले पर्वतारोही अक्सर अपना रास्ता भटक जाते हैं; उन्हें महसूस होता है कि वे शिखर की ओर बढ़ रहे हैं, लेकिन वे फिर वापस नीचे ही आ जाते हैं।</p>
<p><strong>मानसरोवर और राक्षस ताल का रहस्य<br /></strong>कैलाश के तलहटी में दो झीलें हैं जो दो अलग-अलग ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती हैं-</p>
<p>मानसरोवर- ताजे पानी की झील, जो पवित्रता और सकारात्मकता का प्रतीक है।<br />राक्षस ताल- खारे पानी की झील, जहां कोई जीवन नहीं है और इसे नकारात्मकता से जोड़ा जाता है।<br />हैरान करने बात है कि इन दोनों झीलों के बीच की दूरी बहुत कम है, लेकिन इनका स्वभाव एक-दूसरे से बिल्कुल अलग है।</p>
<p><strong>कैलाश की परिक्रमा<br /></strong>क्योंकि शिखर पर चढ़ना वर्जित है, श्रद्धालु इसकी कोरा या परिक्रमा करते हैं। यह 52 किलोमीटर का मुश्किल रास्ता है। माना जाता है कि इसकी एक परिक्रमा करने से जीवन के सभी पाप धुल जाते हैं।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>बारिश के दिन Delhi में घूमने के लिए बेस्ट हैं ये 5 Hidden Spots</title>
		<link>https://akhandbharatnews.in/NewsArticle/160738/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Akhand Bharat News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 02 May 2026 12:31:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पर्यटन]]></category>
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					<description><![CDATA[जब आसमान में काले बादल छाते हैं और ठंडी हवाएं चलती हैं, तो घर में बैठने का मन भला किसका करता है? हालांकि, बारिश होते ही इंडिया गेट, कनॉट प्लेस या हौज खास जैसी जगहों पर इतनी भीड़ हो जाती है कि सारा मजा खराब हो जाता है। अगर आप दिल्ली की भीड़-भाड़ से दूर, &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img loading="lazy" width="584" height="317" src="https://akhandbharatnews.in/wp-content/uploads/2026/05/56-2.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async"></p>
<p>जब आसमान में काले बादल छाते हैं और ठंडी हवाएं चलती हैं, तो घर में बैठने का मन भला किसका करता है? हालांकि, बारिश होते ही इंडिया गेट, कनॉट प्लेस या हौज खास जैसी जगहों पर इतनी भीड़ हो जाती है कि सारा मजा खराब हो जाता है।</p>
<p>अगर आप दिल्ली की भीड़-भाड़ से दूर, बारिश की बूंदों और हरियाली के बीच सुकून के कुछ पल बिताना चाहते हैं, तो हम आपके लिए लाए हैं दिल्ली के 5 ऐसे ‘हिडन स्पॉट्स’ (Rainy Day Spots In Delhi)। यकीन मानिए, यहां खींची गई आपकी तस्वीरें देखकर आपके दोस्त भी पूछेंगे- “प्लीज बता, ये कौन-सी जगह है?”</p>
<p><strong>जहाज महल, महरौली<br /></strong>अगर आप बारिश के मौसम में किसी ऐसी जगह जाना चाहते हैं जो आपको किसी पुराने शाही जमाने में ले जाए, तो ‘जहाज महल’ बेहतरीन जगह है। इस महल का निर्माण कुछ इस तरह हुआ है कि इसके बगल में मौजूद झील जब बारिश के पानी से भर जाती है, तो यह महल पानी पर तैरते हुए एक बड़े जहाज जैसा दिखता है।</p>
<p>बता दें, बारिश के दौरान यहां का नजारा बहुत ही खूबसूरत हो जाता है। पुरानी ईंटों और हरियाली के बीच फोटोग्राफी के लिए यह एक परफेक्ट जगह है।</p>
<p><strong>चंपा गली, साकेत<br /></strong>बारिश हो रही हो, हाथ में एक गर्म कॉफी का कप हो और बैकग्राउंड में हल्की-हल्की लाइटें जल रही हों… क्या यह किसी हॉलीवुड फिल्म के सीन जैसा नहीं लगता? साकेत की तंग गलियों में छिपी ‘चंपा गली’ आपको बिल्कुल ऐसा ही एहसास कराएगी।</p>
<p>यह जगह अपने बोहेमियन लुक, छोटे-छोटे खूबसूरत कैफे और विंटेज वाइब के लिए जानी जाती है। बारिश के दिन यहां बैठकर दोस्तों के साथ गपशप करना और तस्वीरें क्लिक करना एक शानदार एक्सपीरिएंस है।</p>
<p><strong>महरौली आर्कियोलॉजिकल पार्क<br /></strong>कुतुब मीनार के ठीक बगल में स्थित होने के बावजूद, यह जगह लोगों की नजरों से काफी बची हुई है। लगभग 200 एकड़ में फैला यह पार्क बारिश के मौसम में बिल्कुल धुलकर साफ हो जाता है और यहां की हरियाली देखते ही बनती है।</p>
<p>हरे-भरे पेड़ों के बीच छिपे पुराने मकबरे और खंडहर एक बहुत ही ‘मूडी’ और रहस्यमयी बैकग्राउंड देते हैं। अगर आपको नेचर और पुरानी इमारतों का कॉम्बिनेशन पसंद है, तो यहां जरूर जाएं।</p>
<p><strong>संजय वन<br /></strong>क्या आप यकीन करेंगे कि दिल्ली के बीचों-बीच एक घना जंगल भी है? वसंत कुंज और महरौली के पास स्थित ‘संजय वन’ बारिश के दिनों में किसी हिल स्टेशन से कम नहीं लगता।</p>
<p>मिट्टी की सोंधी खुशबू, पेड़ों से गिरती पानी की बूंदें और मोर की आवाजें आपको एक अलग ही दुनिया में ले जाएंगी। अगर आपको बारिश में थोड़ी एडवेंचरस वॉक करना पसंद है, तो अपने आरामदायक जूते पहनें और यहां निकल पड़ें।</p>
<p><strong>भारद्वाज लेक, असोला भट्टी<br /></strong>यह दिल्ली के सबसे हिडेन स्पॉट्स में से एक है। दिल्ली और फरीदाबाद के बॉर्डर पर स्थित असोला भट्टी वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी के अंदर एक बेहद खूबसूरत और नीले पानी की झील है। जी हां, ऊंचे-ऊंचे पत्थरों और घने पेड़ों से घिरी यह झील बारिश के मौसम में अपने सबसे सुंदर रूप में होती है। यहां तक पहुंचने के लिए थोड़ा पैदल चलना पड़ता है, लेकिन यहां पहुंचकर जो नजारा दिखता है, वह सारी थकान मिटा देता है। सबसे खास बात कि यहां की तस्वीरें देखकर कोई कह ही नहीं सकता कि यह जगह दिल्ली में है।</p>
<p>ध्यान रहे, बारिश के मौसम में संजय वन या भारद्वाज लेक जैसी जगहों पर जाते समय अच्छे ग्रिप वाले जूते जरूर पहनें क्योंकि रास्ते थोड़े फिसलने वाले हो सकते हैं।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>हेलीकॉप्टर से मात्र इतने रुपये में पहुंचे बाबा केदार के द्वार</title>
		<link>https://akhandbharatnews.in/NewsArticle/160215/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Akhand Bharat News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 13 Apr 2026 12:31:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पर्यटन]]></category>
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					<description><![CDATA[उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध ‘चार धाम यात्रा’ का बिगुल बज चुका है। जी हां, देश-दुनिया के श्रद्धालुओं और स्थानीय व्यापारियों का लंबा इंतजार अब खत्म हो रहा है, क्योंकि 19 अप्रैल से इस पावन यात्रा का शुभारंभ होने वाला है। अगर आपका सपना भी इस साल बाबा केदारनाथ के दर्शन करने का है और आप &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img loading="lazy" width="916" height="455" src="https://akhandbharatnews.in/wp-content/uploads/2026/04/78-3.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://akhandbharatnews.in/wp-content/uploads/2026/04/78-3.jpg 916w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/04/78-3-768x381.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 916px) 100vw, 916px"></p>
<p>उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध ‘चार धाम यात्रा’ का बिगुल बज चुका है। जी हां, देश-दुनिया के श्रद्धालुओं और स्थानीय व्यापारियों का लंबा इंतजार अब खत्म हो रहा है, क्योंकि 19 अप्रैल से इस पावन यात्रा का शुभारंभ होने वाला है।</p>
<p>अगर आपका सपना भी इस साल बाबा केदारनाथ के दर्शन करने का है और आप समय बचाने के लिए हवाई सफर चुनना चाहते हैं, तो इस आर्टिकल में हेलीकॉप्टर बुकिंग से जुड़ी सभी जरूरी जानकारियां हम आपके लिए लेकर आए हैं, जिनसे आप बिना किसी परेशानी और धोखाधड़ी के अपनी टिकट बुक कर सकते हैं।</p>
<p><strong>किस दिन खुलेंगे कौन-से कपाट?<br /></strong>यात्रा की शुरुआत 19 अप्रैल को यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ होगी। इसके बाद 22 अप्रैल को केदारनाथ धाम और 23 अप्रैल को बद्रीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। वहीं, सिखों के पवित्र तीर्थ स्थल हेमकुंड साहिब के कपाट 23 मई को खुलेंगे।</p>
<p><strong>हेलीकॉप्टर सेवा के लिए कब और कहां से करें बुकिंग?<br /></strong>केदारनाथ पहुंचने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए तीन मुख्य जगहों- फाटा, गुप्तकाशी और सिरसी से शटल हेलीकॉप्टर सेवाएं दी जाती हैं (Kedarnath Helicopter Booking 2026)।</p>
<p><strong>बुकिंग कब शुरू होगी?<br /></strong>टिकटों की ऑनलाइन बुकिंग 11 अप्रैल 2026 को शाम 6 बजे से खोल दी जाएगी।</p>
<p><strong>कब से कब तक की यात्रा?<br /></strong>अभी यह बुकिंग उन यात्रियों के लिए मान्य होगी जो 22 अप्रैल से लेकर 11 मई के बीच दर्शन करने वाले हैं।</p>
<p>आधिकारिक वेबसाइट: हेलीकॉप्टर बुक करने का एकमात्र सुरक्षित और आधिकारिक प्लेटफॉर्म IRCTC की वेबसाइट heliyatra.irctc.co.in है।</p>
<p><strong>कितना है हेलीकॉप्टर का किराया?<br /></strong>अगर आप हेलीकॉप्टर से राउंड ट्रिप की प्लानिंग कर रहे हैं, तो उसका अनुमानित किराया कुछ इस तरह है:</p>
<p>सिरसी रूट: लगभग ₹6,390<br />फाटा रूट: लगभग ₹10,164<br />गुप्तकाशी रूट: लगभग ₹12,762</p>
<p><strong>बुकिंग की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया और नियम<br /></strong>अपनी सीट सुरक्षित करने के लिए आपको नीचे दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा:</p>
<p>सबसे पहले रजिस्ट्रेशन: टिकट बुक करने से पहले आपका उत्तराखंड पर्यटन के पोर्टल पर ‘चार धाम यात्रा पंजीकरण’ होना अनिवार्य है।<br />स्लॉट का चुनाव: रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद heliyatra.irctc.co.in पर जाएं, अपना अकाउंट लॉग इन करें और अपनी सुविधानुसार स्लॉट बुक करें।<br />सीटों की लिमिट: एक यूजर आईडी से एक बार में अधिकतम 6 टिकट ही बुक हो सकते हैं। अगर आपको 12 टिकटों की जरूरत है, तो आपको अपने अकाउंट से दो अलग-अलग बार (6-6 करके) लॉग इन कर बुकिंग करनी होगी।<br />रिफंड की सुविधा: अगर टिकट लेने के बाद किसी कारण से आप यात्रा नहीं कर पाते हैं, तो घबराने की कोई बात नहीं है। टिकट कैंसिल होने पर 5 से 7 दिनों के भीतर आपके पैसे वापस आपके खाते में आ जाएंगे।</p>
<p><strong>साइबर ठगों से कैसे बचें?<br /></strong>भक्तों की भारी डिमांड को देखते हुए हर साल टिकटों को लेकर आपाधापी रहती है। इसी मजबूरी का फायदा उठाकर साइबर ठग एक्टिव हो जाते हैं। ये ठग बिल्कुल आईआरसीटीसी जैसी दिखने वाली नकली वेबसाइटें बना लेते हैं। इसके अलावा, व्हाट्सएप और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ‘जल्दी टिकट’ या ‘सस्ते दामों’ का लालच देकर लोगों की गाढ़ी कमाई लूटने की कोशिश करते हैं।</p>
<p>उत्तराखंड पुलिस इन ठगों को लेकर काफी सख्त है और लगातार कार्रवाई कर रही है। अब तक कई फर्जी फोन नंबर्स और नकली वेबसाइटों को ब्लॉक किया जा चुका है। यात्रियों को सुरक्षित रखने के लिए पुलिस की तरफ से खास गाइडलाइन भी बनाई गई है।</p>
<p>बता दें, ठगी से बचने का सबसे आसान तरीका है सतर्कता। अपनी टिकट सिर्फ और सिर्फ आधिकारिक वेबसाइट (heliyatra.irctc.co.in) के जरिए ही बुक करें। किसी भी अनजान व्यक्ति के व्हाट्सएप मैसेज, अनजान कॉल्स या सोशल मीडिया के लुभावने विज्ञापनों पर बिल्कुल भरोसा न करें।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>जल्द शुरू होने जा रही Char Dham Yatra</title>
		<link>https://akhandbharatnews.in/NewsArticle/160213/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Akhand Bharat News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 13 Apr 2026 12:31:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पर्यटन]]></category>
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					<description><![CDATA[उत्तराखंड की देवभूमि एक बार फिर भक्तों के स्वागत के लिए तैयार हो रही है। हर हिंदू का यह सपना होता है कि वह अपने जीवन में कम से कम एक बार चार धाम की पवित्र यात्रा पर जरूर जाए। जैसे ही गर्मियों का मौसम दस्तक देता है, इन पहाड़ियों में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img width="863" height="403" src="https://akhandbharatnews.in/wp-content/uploads/2026/04/6-10.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://akhandbharatnews.in/wp-content/uploads/2026/04/6-10.jpg 863w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/04/6-10-768x359.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 863px) 100vw, 863px"></p>
<p>उत्तराखंड की देवभूमि एक बार फिर भक्तों के स्वागत के लिए तैयार हो रही है। हर हिंदू का यह सपना होता है कि वह अपने जीवन में कम से कम एक बार चार धाम की पवित्र यात्रा पर जरूर जाए।</p>
<p>जैसे ही गर्मियों का मौसम दस्तक देता है, इन पहाड़ियों में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगती है। बता दें, यह सिर्फ एक सफर नहीं है, बल्कि सदियों से चली आ रही एक अटूट आस्था है।</p>
<p>अगर आप भी इस साल इस आध्यात्मिक यात्रा का हिस्सा बनने की सोच रहे हैं, तो आपके लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि मंदिरों के कपाट कब खुल रहे हैं और इसकी बुकिंग कैसे की जाती है।</p>
<p><strong>कब से शुरू हो रही है चार धाम यात्रा?<br /></strong>साल 2026 में आस्था के इस सबसे बड़े सफर की शुरुआत 19 अप्रैल से होने जा रही है (Char Dham Yatra 2026)। हिंदू पंचांग के अनुसार, यह दिन ‘अक्षय तृतीया’ का है जिसे बेहद पावन और शुभ माना जाता है। इसी दिन से यात्रा का विधिवत आरंभ होगा और सबसे पहले यमुनोत्री व गंगोत्री मंदिरों के दरवाजे दर्शनार्थियों के लिए खोल दिए जाएंगे।</p>
<p><strong>यहां देखें सभी चारों धामों के कपाट खुलने की निर्धारित तारीखें:</strong></p>
<p>यमुनोत्री धाम: 19 अप्रैल 2026<br />गंगोत्री धाम: 19 अप्रैल 2026<br />केदारनाथ धाम: 22 अप्रैल 2026<br />बद्रीनाथ धाम: 23 अप्रैल 2026</p>
<p><strong>चार धाम यात्रा के लिए कैसे करें ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन?<br /></strong>इस यात्रा पर जाने के लिए सरकार की तरफ से रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य किया गया है। आप अपने मोबाइल या कंप्यूटर की मदद से बिना किसी परेशानी के इसे खुद कर सकते हैं। इसके लिए बस नीचे दिए गए आसान स्टेप्स को फॉलो करें:</p>
<p>सबसे पहले उत्तराखंड पर्यटन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट (uttarakhandtourism.gov.in) को खोलें।<br />अपना पूरा नाम और चालू मोबाइल नंबर डालकर एक अकाउंट बनाएं और OTP के जरिए इसे प्रमाणित करें।<br />पोर्टल पर लॉगिन करने के बाद ‘Create/Manage Tour’ वाले विकल्प को चुनें।<br />अब अपनी सुविधानुसार यात्रा की तारीखें और उन धामों का चुनाव करें जहां आपको दर्शन करने हैं।<br />आपके साथ जा रहे सभी यात्रियों की सही डिटेल्स भरें और उनकी फोटो अपलोड करें।<br />स्लॉट की उपलब्धता के आधार पर अपनी अंतिम तारीख चुनें और फॉर्म को सबमिट कर दें।<br />प्रक्रिया पूरी होते ही आपको एक QR कोड वाला यात्रा पास मिल जाएगा। इसे डाउनलोड करके इसका प्रिंट निकाल लें और यात्रा के दौरान अपने पास सुरक्षित रखें।</p>
<p><strong>सफर पर निकलने से पहले रखें इन बातों का ध्यान<br /></strong>ऊंचाई वाले इन पहाड़ी रास्तों का सफर बहुत सुंदर होता है, लेकिन यहां मौसम और रास्तों की कुछ चुनौतियां भी होती हैं। इसलिए निकलने से पहले कुछ खास बातों का ध्यान रखना जरूरी है:</p>
<p>जरूरी कागज: अपनी पहचान साबित करने के लिए अपना ‘आधार कार्ड’ और ‘यात्रा पास’ हमेशा अपने साथ रखें।<br />मेडिकल चेकअप: पहाड़ों की ऊंचाई और हवा का दबाव हर किसी को सूट नहीं करता, इसलिए यात्रा पर जाने से पहले किसी डॉक्टर से अपना हेल्थ चेकअप जरूर करवा लें।<br />मौसम के कपड़े: पहाड़ों पर अचानक ठंड बढ़ सकती है या बारिश हो सकती है। इसलिए अपने बैग में हमेशा पर्याप्त गर्म कपड़े और एक रेनकोट जरूर रखें।</p>
<p>अपनी चार धाम यात्रा की योजना अभी से बना लें और समय रहते अपना रजिस्ट्रेशन करवाना न भूलें, ताकि आपको ऐन मौके पर किसी तरह की असुविधा न हो।</p>
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		<title>2600 ईसा पूर्व कैसे बनी दुनिया की सबसे पुरानी पक्की सड़क?</title>
		<link>https://akhandbharatnews.in/NewsArticle/160117/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Akhand Bharat News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 09 Apr 2026 12:31:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पर्यटन]]></category>
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					<description><![CDATA[क्या आपने कभी ऐसी सड़क के बारे में सोचा है जो आपको आधुनिक दुनिया की भीड़भाड़ से निकालकर सीधे हजारों साल पुरानी सभ्यता में ले जाए? मिस्र के गीजा शहर की ओर जाने वाला रास्ता बिल्कुल ऐसा ही है। यह ऐतिहासिक सड़क नील नदी के पश्चिमी किनारे पर, काहिरा के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। यह &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img loading="lazy" width="865" height="486" src="https://akhandbharatnews.in/wp-content/uploads/2026/04/67-3.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://akhandbharatnews.in/wp-content/uploads/2026/04/67-3.jpg 865w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/04/67-3-768x432.jpg 768w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/04/67-3-390x220.jpg 390w" sizes="auto, (max-width: 865px) 100vw, 865px"></p>
<p>क्या आपने कभी ऐसी सड़क के बारे में सोचा है जो आपको आधुनिक दुनिया की भीड़भाड़ से निकालकर सीधे हजारों साल पुरानी सभ्यता में ले जाए? मिस्र के गीजा शहर की ओर जाने वाला रास्ता बिल्कुल ऐसा ही है।</p>
<p>यह ऐतिहासिक सड़क नील नदी के पश्चिमी किनारे पर, काहिरा के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। यह रास्ता यात्रियों को आज के शोर-शराबे वाले काहिरा से दूर, प्राचीन मिस्र के अद्भुत पिरामिडों तक ले जाता है।</p>
<p><strong>2600 ईसा पूर्व बनी 12 किलोमीटर लंबी सड़क<br /></strong>आपको जानकर हैरानी होगी कि यह दुनिया की सबसे पुरानी पक्की सड़कों में से एक मानी जाती है। इसका निर्माण लगभग 2600 ईसा पूर्व यानी मिस्र के पुराने साम्राज्य के चौथे राजवंश के समय हुआ था। 4,600 वर्षों से भी अधिक पुरानी यह सड़क करीब 12 किलोमीटर लंबी और 6.5 फीट चौड़ी है। इतने साल बीत जाने के बाद भी यह सड़क प्राचीन मिस्र की बेहतरीन वास्तुकला और शानदार इंजीनियरिंग की कहानी बयां करती है।</p>
<p><strong>बिना इस सड़क के कभी न बन पाते मिस्र के अजूबे<br /></strong>आखिर इतनी पुरानी सड़क क्यों बनाई गई थी? दरअसल, प्राचीन काल में पिरामिड और भव्य मंदिर बनाने के लिए बहुत भारी पत्थरों की जरूरत होती थी। ये पत्थर नील नदी के किनारे मौजूद चट्टानी खदानों से निकाले जाते थे। इन भारी-भरकम पत्थरों को खदानों से निर्माण स्थल तक लाने के लिए ही इसी रास्ते का इस्तेमाल किया जाता था। इसी सड़क की बदौलत मिस्र के उन विशाल और ऐतिहासिक पिरामिडों का निर्माण संभव हो पाया, जो आज 4500 सालों से भी ज्यादा पुराने हैं।</p>
<p><strong>शाही इतिहास का गवाह है मिस्र का यह मार्ग<br /></strong>यह रास्ता सिर्फ पत्थरों की ढुलाई तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका गहरा सांस्कृतिक महत्व भी है। यह सड़क मानव सभ्यता की एक बहुत बड़ी और महान उपलब्धि का प्रतीक है। पुराने समय में इस सड़क का उपयोग मुख्य रूप से शाही और धार्मिक आयोजनों के लिए किया जाता था। राजाओं के भव्य जुलूस इसी रास्ते से होकर गुजरते थे, जिसके कारण गीजा की इस ऐतिहासिक सड़क को ‘प्रोसेशनल वे’ (जुलूस का मार्ग) भी कहा जाता है।</p>
<p><strong>आज कैसा है इस सड़क का नजारा?<br /></strong>आज जब यात्री इस रास्ते से गुजरते हैं, तो आसपास का रेगिस्तानी नजारा उन्हें एक अलग ही रोमांच से भर देता है। सफर के दौरान रास्ते में ऊंटों की सवारी और वहां के स्थानीय बाजारों की खूबसूरत झलक भी देखने को मिलती है। वहीं, जब शाम ढलती है, तो सूर्यास्त की सुनहरी रोशनी में पिरामिडों की चमक इस सड़क के सफर को और भी ज्यादा जादुई और यादगार बना देती है।</p>
</div>
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		<item>
		<title>टूरिस्ट स्पॉट जैसे दिखते हैं भारत के ये 8 एयरपोर्ट!</title>
		<link>https://akhandbharatnews.in/NewsArticle/159822/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Akhand Bharat News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 29 Mar 2026 12:31:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पर्यटन]]></category>
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					<description><![CDATA[देशभर में आज नोएडा के भव्य ‘जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ की चर्चा बनी हुई है। दरअसल, 28 मार्च शनिवार को एयरपोर्ट का शानदार उद्घाटन किया गया। यह हवाई अड्डा अपनी आधुनिकता और विशालता के लिए सुर्खियां बटोर ही रहा है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में पहले से ही कई ऐसे हवाई अड्डे मौजूद &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img width="894" height="494" src="https://akhandbharatnews.in/wp-content/uploads/2026/03/65-13.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://akhandbharatnews.in/wp-content/uploads/2026/03/65-13.jpg 894w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/03/65-13-768x424.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 894px) 100vw, 894px"></p>
<p>देशभर में आज नोएडा के भव्य ‘जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ की चर्चा बनी हुई है। दरअसल, 28 मार्च शनिवार को एयरपोर्ट का शानदार उद्घाटन किया गया।</p>
<p>यह हवाई अड्डा अपनी आधुनिकता और विशालता के लिए सुर्खियां बटोर ही रहा है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में पहले से ही कई ऐसे हवाई अड्डे मौजूद हैं, जो किसी पर्यटन स्थल से कम नहीं हैं? आइए सैर करते हैं भारत के कुछ सबसे मनमोहक हवाई अड्डों की:-</p>
<p><strong>इंदिरा गांधी इंटरनेशनल (IGI) एयरपोर्ट, नई दिल्ली<br /></strong>यह देश का सबसे बिजी एयरपोर्ट होने के साथ-साथ स्टाइल का भी प्रतीक है। इसका टर्मिनल 3 अपनी शानदार बनावट, वर्ल्ड-क्लास लाउंज और खूबसूरत कलाकृतियों के लिए दुनियाभर में मशहूर है। यहां कदम रखते ही राजधानी की भव्यता का एहसासहोता है।</p>
<p><strong>छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट, मुबंई<br /></strong>इसका टर्मिनल 2 (T2) मॉडर्न डिजाइन और भारतीय संस्कृति का एक बेहतरीन कॉम्बिनेशन है। यहां मौजूद ‘जया हे’ म्यूजियम में 7,000 से ज्यादा कलाकृतियां सजाई गई हैं, जो इसे सिर्फ एक एयरपोर्ट नहीं बल्कि एक सांस्कृतिक धरोहर भी बनाती हैं।</p>
<p><strong>कुशोक बकुला रिम्पोची एयरपोर्ट, लेह<br /></strong>यह एयरपोर्ट अपने आप में बेहद खास है। यह हिमालय की बर्फीली वादियों के बीच बसा दुनिया के सबसे ऊंचे एयरपोर्ट्स में से एक है। यहां से उड़ाने भरने पर खिड़की से दिखने वाले बर्फ से ढके पहाड़ों के नजारे इतने खूबसूरत होते हैं, जिन्हें आप जिंदगी भर नहीं भूल पाएंगे।</p>
<p><strong>वीर सावरकर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, पोर्ट ब्लेयर<br /></strong>अंडमान और निकोबार के इस एयरपोर्ट के रनवे से ही आपको नीले पानी और हरी-भरी वादियों के दिलकश नजारे देखने को मिलते हैं। प्रकृति प्रेमियों के लिए यहां से अपनी यात्रा शुरू करना किसी सपने जैसा है।</p>
<p><strong>लेंगपुई एयरपोर्ट, मिजोरम<br /></strong>पहाड़ियों के बीच एक पठार पर बना यह एयरपोर्ट अपने आप में एक अजूबा है। इसका रनवे नेचुरली ढलान वाला है, जो इसे तकनीकी और नेचुरली दोनों ही नजरिए से बेहद रोमांचक और खास बनाता है।</p>
<p><strong>कोचीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट, केरल<br /></strong>यह एयरपोर्ट अपने आप में बेहद खास है, क्योंकि यह दुनिया का पहला ऐसा हवाई अड्डा है, जो पूरी तरह से सोलर एनर्जी से चलता है। इसकी हरियाली और ईको-फ्रेंडली डिजाइन न सिर्फ पर्यावरण को बचाते हैं, बल्कि आंखों को भी बेहद सुकून देते हैं।</p>
<p><strong>केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, बेंगलुरु<br /></strong>भारत की ‘सिलिकॉन वैली’ का यह एयरपोर्ट अपने खूबसूरत गार्डन्स और शानदार आर्किटेक्चर के लिए मशहूर है। यह शहर की हाई-टेक इमेज के साथ-साथ एक बेहद गर्मजोशी भरा और सुकून देने वाला माहौल देता है।</p>
<p><strong>जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, राजस्थान<br /></strong>यहां आते ही आपको राजपूताना शान और संस्कृति की झलक मिल जाएगी। इसकी पारंपरिक सजावट और जीवंत रंग ‘गुलाबी शहर’ की विरासत को बेहद खूबसूरती से दर्शाते हैं।</p>
</div>
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		<item>
		<title>हवाई यात्री ध्यान दें! अब 48 घंटे में टिकट कैंसिल करने पर मिलेगा पूरा रिफंड</title>
		<link>https://akhandbharatnews.in/NewsArticle/159824/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Akhand Bharat News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 29 Mar 2026 12:31:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पर्यटन]]></category>
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					<description><![CDATA[क्या आप भी फ्लाइट की टिकट कैंसिल करने पर कटने वाले भारी-भरकम चार्ज और रिफंड के लंबे इंतजार से परेशान हैं? अगर हां, तो अब आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है। DGCA ने 26 मार्च 2026 से हवाई टिकट रिफंड के नए नियम लागू कर दिए हैं। इन नियमों का खास मकसद रिफंड प्रक्रिया &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img loading="lazy" width="919" height="516" src="https://akhandbharatnews.in/wp-content/uploads/2026/03/56-33.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://akhandbharatnews.in/wp-content/uploads/2026/03/56-33.jpg 919w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/03/56-33-768x431.jpg 768w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/03/56-33-390x220.jpg 390w" sizes="auto, (max-width: 919px) 100vw, 919px"></p>
<p>क्या आप भी फ्लाइट की टिकट कैंसिल करने पर कटने वाले भारी-भरकम चार्ज और रिफंड के लंबे इंतजार से परेशान हैं? अगर हां, तो अब आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है। DGCA ने 26 मार्च 2026 से हवाई टिकट रिफंड के नए नियम लागू कर दिए हैं।</p>
<p>इन नियमों का खास मकसद रिफंड प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और यात्रियों के लिए सुविधाजनक बनाना है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि इन नए नियमों से आपको क्या-क्या फायदे मिलने वाले हैं।</p>
<p><strong>48 घंटे का ‘लुक-इन’ ऑप्शन और फ्री कैंसिलेशन<br /></strong>यह नियम उन लोगों के लिए बेहद काम का है जिनसे टिकट बुक करते समय अक्सर कोई गलती हो जाती है या जिनका प्लान अचानक बदल जाता है।</p>
<p>अब आपको टिकट बुक करने के 48 घंटे के भीतर उसे कैंसिल करने या उसमें बदलाव करने की आजादी मिलेगी, और इसके लिए कोई भी एक्स्ट्रा कैंसिलेशन चार्ज नहीं देना होगा।</p>
<p>ध्यान रखने वाली बात है कि यह फायदा आपको तभी मिलेगा जब आपने एयरलाइन की अपनी वेबसाइट से सीधे बुकिंग की हो। साथ ही, यह नियम उन घरेलू उड़ानों पर लागू नहीं होगा जिनकी रवानगी बुकिंग के 7 दिन के अंदर है। विदेशी उड़ानों के लिए यह अंतर 15 दिन का होना चाहिए।</p>
<p><strong>रिफंड के लिए नहीं करना होगा लंबा इंतजार<br /></strong>नए नियमों ने रिफंड मिलने की समय-सीमा को पूरी तरह से तय कर दिया है:</p>
<p>नकद बुकिंग: अगर आपने एयरलाइन के काउंटर से कैश देकर टिकट खरीदी थी, तो कैंसिल करने पर आपको वहीं से तुरंत नकद रिफंड मिल जाएगा।<br />क्रेडिट कार्ड बुकिंग: क्रेडिट कार्ड से किए गए पेमेंट का पैसा टिकट कैंसिल होने के 7 दिन के अंदर सीधे आपके कार्ड अकाउंट में वापस आ जाएगा।<br />ट्रैवल एजेंट या वेबसाइट से बुकिंग: अगर आपने किसी ट्रैवल एजेंट या थर्ड-पार्टी पोर्टल से टिकट ली है, तो भी रिफंड की असली जिम्मेदारी एयरलाइन की ही होगी। एयरलाइन को यह पक्का करना होगा कि 14 वर्किंग डेज के अंदर आपका रिफंड प्रोसेस हो जाए।</p>
<p><strong>कैंसिलेशन चार्ज की सीमा तय<br /></strong>अब एयरलाइंस और ट्रैवल एजेंट कैंसिलेशन के नाम पर अपनी मर्जी से मनमाना पैसा नहीं काट सकते।</p>
<p>किसी भी हाल में कैंसिलेशन चार्ज आपके टिकट के ‘बेसिक फेयर’ और ‘फ्यूल सरचार्ज’ को मिलाकर बनने वाली रकम से ज्यादा नहीं हो सकता।<br />DGCA ने यह भी अनिवार्य कर दिया है कि टिकट बुक करते वक्त ही कैंसिलेशन चार्ज की पूरी जानकारी साफ-साफ शब्दों में यात्री को बताई जानी चाहिए।</p>
<p><strong>टैक्स और फीस की पूरी वापसी<br /></strong>अगर आपकी टिकट ‘प्रमोशनल’ या स्पेशल किराये वाली है (जिसका बेसिक किराया वापस नहीं होता), या आप अपनी फ्लाइट नहीं ले पाते हैं, तो भी एयरलाइंस को आपको सारे टैक्स और एयरपोर्ट फीस (जैसे UDF, ADF, PSF) वापस लौटाने ही होंगे।</p>
<p><strong>बिना आपकी मर्जी के पैसे ‘क्रेडिट शेल’ में नहीं जाएंगे<br /></strong>कई बार एयरलाइंस पैसे वापस करने के बजाय उसे आपके अकाउंट में ‘क्रेडिट’ के तौर पर सेव कर देती थीं, ताकि आप अगली बार उनकी फ्लाइट बुक करें। अब एयरलाइंस ऐसा खुद से नहीं कर सकतीं। आपके पैसे को ‘क्रेडिट शेल’ में तभी रखा जाएगा, जब आप खुद इसकी इजाजत देंगे।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>MP में देवी का अनोखा धाम, जहां 300 फीट ऊंची चोटी पर एक साथ विराजीं हैं तुलजा भवानी और मां चामुंडा</title>
		<link>https://akhandbharatnews.in/NewsArticle/159768/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Akhand Bharat News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 27 Mar 2026 12:31:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पर्यटन]]></category>
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					<description><![CDATA[मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र में, इंदौर और उज्जैन के करीब बसा देवास शहर अपनी कला, साहित्य और अध्यात्म के लिए जाना जाता है। इस शहर की सबसे बड़ी पहचान है यहां की ऐतिहासिक ‘माता टेकरी’, जहां आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ता है कि हर कोई मां की भक्ति में लीन हो जाता है। अगर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img loading="lazy" width="920" height="468" src="https://akhandbharatnews.in/wp-content/uploads/2026/03/6-18.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://akhandbharatnews.in/wp-content/uploads/2026/03/6-18.jpg 920w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/03/6-18-768x391.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 920px) 100vw, 920px"></p>
<p>मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र में, इंदौर और उज्जैन के करीब बसा देवास शहर अपनी कला, साहित्य और अध्यात्म के लिए जाना जाता है। इस शहर की सबसे बड़ी पहचान है यहां की ऐतिहासिक ‘माता टेकरी’, जहां आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ता है कि हर कोई मां की भक्ति में लीन हो जाता है। अगर आप भी यहां दर्शन करने की सोच रहे हैं, तो आइए जानते हैं इस चमत्कारिक और ऐतिहासिक स्थल से जुड़ी हर एक दिलचस्प जानकारी।</p>
<p><strong>देवास का नाम कैसे पड़ा?<br /></strong>इस शहर के नामकरण के पीछे मुख्य रूप से दो मान्यताएं हैं:</p>
<p>धार्मिक मान्यता: ऐसा माना जाता है कि दो देवियों (देवों) के वास के कारण ही इस स्थान का नाम ‘देवास’ पड़ा।<br />ऐतिहासिक मत: कुछ इतिहासकारों का मानना है कि ‘दिवासा’ नाम के एक अंग्रेज व्यापारी के यहां आने के कारण इसका नाम देवास रखा गया। हालांकि, लोगों की गहरी आस्था देवियों के वास वाली कहानी को ही मानती है।</p>
<p><strong>सती के रक्त से बना ‘रक्तपीठ’<br /></strong>युवा लेखक अमितराव पवार के अनुसार, माता टेकरी को एक ‘रक्तपीठ’ माना जाता है। मान्यता है कि यहां माता सती के हृदय भाग से रक्त की बूंदें गिरी थीं। इसी पवित्र स्थान पर पहाड़ों के बीच से रक्तवाहिनी मां चामुंडा प्रकट हुईं, जबकि मां तुलजा भवानी यहां स्वयंभू अवतरित हुईं।</p>
<p><strong>रूठी हुई दो बहनों की रोचक कथा<br /></strong>यहां मां तुलजा भवानी को ‘बड़ी माता’ और मां चामुंडा को ‘छोटी बहन’ या ‘छोटी माता’ कहा जाता है। एक पुरानी किंवदंती के अनुसार, एक बार दोनों बहनों में किसी बात को लेकर विवाद हो गया और वे नाराज होकर टेकरी छोड़कर जाने लगीं।</p>
<p>बड़ी माता गुस्से में पाताल में समाने लगीं, जबकि छोटी माता टेकरी से नीचे उतरने लगीं। यह देखकर भैरवजी और हनुमानजी उन्हें मनाने आए। तब तक बड़ी माता का आधा शरीर पाताल में जा चुका था और छोटी माता काफी नीचे आ चुकी थीं। विनती सुनने के बाद दोनों देवियां उसी अवस्था में वहीं रुक गईं। यही कारण है कि आज भी बड़ी माता का आधा हिस्सा पाताल में माना जाता है।</p>
<p><strong>राजघरानों की कुलदेवियां<br /></strong>देवास में एक समय में पवार राजवंश की दो रियासतों (सीनियर और जूनियर) का शासन था।</p>
<p>जूनियर रियासत: इनकी कुलदेवी मां तुलजा भवानी थीं (कुछ लोग इन्हें होल्कर घराने की कुलदेवी भी मानते हैं)।<br />सीनियर रियासत: इनकी कुलदेवी मां चामुंडा हैं। वर्तमान में सीनियर रियासत का राजपरिवार (विधायक गायत्रीराजे पवार और उनका परिवार) यहीं निवास करता है।</p>
<p><strong>उज्जैन तक जाने वाली 45 किलोमीटर लंबी गुप्त सुरंग<br /></strong>नौवीं शताब्दी के इस मंदिर का इतिहास बहुत गहरा है। उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य यहां अक्सर आते थे और उन्होंने यहां उज्जैन के हरसिद्धि मंदिर की तर्ज पर ‘दीपमालिका’ का निर्माण करवाया था।</p>
<p>सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि प्राचीन काल में टेकरी पर एक गुप्त सुरंग हुआ करती थी, जिसकी लंबाई लगभग 45 किलोमीटर थी। यह सुरंग सीधे उज्जैन की भर्तृहरि गुफा के पास निकलती थी। कहा जाता है कि राजा भर्तृहरि इसी गुप्त रास्ते से माता की पूजा और तपस्या करने यहां आते थे।</p>
<p><strong>नाथ संप्रदाय और संगीत दिग्गजों की तपोभूमि<br /></strong>देवास की यह टेकरी केवल आस्था ही नहीं, बल्कि साधना और कला का भी केंद्र रही है:</p>
<p>नाथ संप्रदाय: गुरु गोरक्षनाथ, राजा भर्तृहरि और शीलनाथ महाराज जैसे कई महान योगियों ने इसे अपनी साधना स्थली बनाया। यहां पूजा भी नाथ संप्रदाय की परंपरा से ही होती है।<br />संगीत की दुनिया: महान शास्त्रीय गायक पं. कुमार गंधर्व जब गंभीर रूप से बीमार हुए, तो वे देवास आ गए। यहां के आध्यात्मिक वातावरण ने उन्हें स्वस्थ कर दिया और वे यहीं बस गए। उनके अलावा उस्ताद रजबअली खां साहब और राजकवि झोकरकर जैसी कई महान विभूतियों का इस धरती से गहरा नाता रहा है।</p>
<p><strong>दर्शन और आरती का समय<br /></strong>टेकरी पर कालिका माता, अन्नपूर्णा माता, खो-खो माता, दक्षिणमुखी हनुमान और भैरव मंदिर जैसे कई अन्य पवित्र स्थल भी हैं। दर्शन की व्यवस्था कुछ इस प्रकार है:</p>
<p>मंदिर खुलने का समय: सुबह 5:00 बजे से रात 11:00 बजे तक<br />तुलजा भवानी आरती: सुबह 5:50 बजे और शाम 6:10 बजे<br />चामुंडा माता आरती: सुबह 6:30 बजे और शाम 6:00 बजे<br />नवरात्र विशेष: मौसम के अनुसार आरती के समय में हल्का बदलाव होता है। नवरात्र के दौरान यहां 24 घंटे माता का दरबार खुला रहता है। शारदीय नवरात्र में लगभग 10 लाख श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं और अष्टमी के दिन राजपरिवार द्वारा विशेष हवन-पूजन किया जाता है।</p>
<p><strong>कैसे पहुंचें माता के दरबार?<br /></strong>पहाड़ी पर स्थित मंदिर तक जाने के लिए 300 से अधिक सीढ़ियां और रैंप है। इसके अलावा, श्रद्धालुओं के लिए रोप-वे की सुविधा भी उपलब्ध है।</p>
<p>हवाई मार्ग: सबसे नजदीकी एयरपोर्ट इंदौर है, जो देवास से मात्र 35 किमी दूर है।<br />रेल मार्ग: देवास जंक्शन सीधे दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद और जयपुर जैसे बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है।<br />सड़क मार्ग: यह शहर नेशनल हाईवे-3 (एबी रोड) पर स्थित है। आप बस या निजी वाहन से मुंबई, भोपाल, कोटा और दिल्ली से आसानी से यहां पहुंच सकते हैं।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>इस बार जयपुर या उदयपुर नहीं, राजस्थान के ये 4 ऑफबीट डेस्टिनेशन्स आपके ट्रिप को बना देंगे यादगार</title>
		<link>https://akhandbharatnews.in/NewsArticle/159332/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Akhand Bharat News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 12 Mar 2026 12:31:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पर्यटन]]></category>
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					<description><![CDATA[राजस्थान का नाम सुनते ही ज्यादातर लोगों के मन में अक्सर जयपुर, उदयपुर, अजमेर और जोधपुर जैसी मशहूर जगहों का ख्याल आता है। इस रंग-बिरंगे राज्य में कुछ ऐसी जगहें भी हैं, जिसके बारे में सिर्फ कम ही लोग जानते हैं। ये लोकेशन न सिर्फ शांत, खूबसूरत और नेचर से भरी है, बल्कि संस्कृति, इतिहास &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img loading="lazy" width="780" height="404" src="https://akhandbharatnews.in/wp-content/uploads/2026/03/5-33.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://akhandbharatnews.in/wp-content/uploads/2026/03/5-33.jpg 780w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/03/5-33-768x398.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 780px) 100vw, 780px"></p>
<p>राजस्थान का नाम सुनते ही ज्यादातर लोगों के मन में अक्सर जयपुर, उदयपुर, अजमेर और जोधपुर जैसी मशहूर जगहों का ख्याल आता है। इस रंग-बिरंगे राज्य में कुछ ऐसी जगहें भी हैं, जिसके बारे में सिर्फ कम ही लोग जानते हैं। ये लोकेशन न सिर्फ शांत, खूबसूरत और नेचर से भरी है, बल्कि संस्कृति, इतिहास और सादगी के लिए भी जानी जाती है।</p>
<p>अगर आप भी हर बार एक जैसी जगह जाकर बोर हो गए हैं और इस बार कुछ नया और हटकर एक्सप्लोर करना चाहते हैं, तो राजस्थान की ये ऑफबीट जगहें आपके ट्रिप को यादगार बना सकती हैं।</p>
<p><strong>राजसमंद</strong></p>
<p>अगर आप किले जैसी जगहों पर जाना पसंद करते हैं, तो राजस्थान के राजसमंद जा सकते हैं। यहां पर आप कुंभलगढ़ किला घूम सकते हैं, जो एक यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट है। यह दुनिया की दूसरी सबसे लंबी और भारत की सबसे बड़ी दीवार है, जिसे ‘द ग्रेट वॉल ऑफ इंडिया’ भी कहा जाता है। इसके चारों तरफ फैले पहाड़ और हरियाली इसे और भी खास बना देती हैं।</p>
<p>यहां आकर आप किले के इतिहास के साथ-साथ जंगल सफारी और ट्रैकिंग का भी मजा ले सकते हैं। वहीं, शाम के समय यहां का नजारा काफी देखने लायक होता है, जहां से आप खूबसूरत तस्वीरें भी ले सकते हैं।</p>
<p><strong>बाड़मेर</strong></p>
<p>बाड़मेर राजस्थान के खूबसूरत शहरों में से एक है। यह शहर अपने किलों, प्राचीन मंदिरों और रेगिस्तानी टीलों के लिए जाना जाता है। भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर कुछ सुकून के पल बिताने के लिए यह लोकेशन आपके लिए परफेक्ट हो सकती है। आप यहां पर महाबार सैंड ड्यून्स, नाकोड़ा जैन मंदिर, किराडू मंदिर और बाड़मेर किला घूम सकते हैं।</p>
<p><strong>झालावाड़</strong></p>
<p>फैमिली या फ्रेंड्स के साथ घूमने के लिए ऑफबीट जगह ढूंढ रहे हैं, तो राजस्थान के झालावाड़ जिले को ऑप्शन में रखें। यहां का वातावरण काफी खूबसूरत, शांत और नेचर से भरा है, जहां आकर आप अपने ट्रिप को यादगार बना सकते हैं। यहां आकर आप झालावाड़ किला, गागरोन किला और चंद्रभागा मंदिर जैसी जगहों को एक्सप्लोर कर सकते हैं।</p>
<p><strong>बूंदी</strong></p>
<p>अपने ट्रिप को मजेदार और यादगार बनाने के लिए राजस्थान के बूंदी शहर को भी चुन सकते हैं। यह शहर अपने पुराने महलों, स्टेपवेल्स (बावड़ियां) और शांत माहौल के लिए जाना जाता है। यहां पर घूमने के लिए तारागढ़ किला और बूंदी पैलेस भी मौजूद है, जहां पर आप अपनी शानदार तस्वीरें ले सकते हैं। इसके अलावा, यहां की बावड़ियां और झरने भी आपको खूब पसंद आएंगे। अगर आप इतिहास और कला में रुचि रखते हैं, तो यह लोकेशन आपके लिए किसी खजाने से कम नहीं है।</p>
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