सिर्फ शराब नहीं, आपकी ये 3 आदतें भी बना रही हैं लिवर को बीमार
अगर थकावट, पेट के ऊपरी ओर दाईं पसली के नीचे किंचित भारीपन और असहजता की अनुभूति होती है, तो फैटी लिवर की स्थिति जांचनी चाहिए…
यकृत, जिगर या लिवर शरीर में त्वचा के बाद सबसे बड़ा अंग है। यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को सुचारु रखने में असाधारण भूमिका निभाता है। हृदय के अतिरिक्त लिवर, किडनी, अमाशय और नाड़ी तंत्र का ठीक काम करना, स्वास्थ्य की गारंटी माना जाता है।
लिवर के स्वास्थ्य के बारे में प्राय: लापरवाही बरती जाती है, जिससे फैटी लिवर की समस्या बहुत आम होती जा रही है। हैरानी की बात है कि विश्व की लगभग 40 प्रतिशत जनसंख्या फैटी लिवर से ग्रसित है, फिर भी बड़ी संख्या में लोग इस बीमारी को लेकर अनभिज्ञ ही रहते हैं।
समझें स्वस्थ लिवर की कार्यप्रणाली को
एक स्वस्थ लिवर शरीर में अनेक प्रकार के कार्य करता है। इसका प्राथमिक कार्य है कि रक्त से विजातीय तत्वों को बहर निकालना तथा उन्हें सम अवस्था में लाना। यह कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करता है तथा बाइल अथवा पित्ताशय के स्राव का भी नियामक है। लिवर खून की उचित तरलता, उसमें रक्त कणों की स्थिति और आवश्यकता पड़ने पर खून के जमाव में सहायता करता है। स्वस्थ लिवर से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है।
फैटी लिवर के लक्षण
फैटी लिवर उस अवस्था को कहते हैं, जब लिवर में फैट यानी वसा की मात्रा एक सीमा से अधिक बढ़ने लगती है। गंभीर अवस्था में लिवर में सूजन, लिवर की कोशिकाओं के सख्त होने, यहां तक कि सिरोसिस जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। पीलिया जैसी अपरिवर्तनशील बीमारी का उत्पन्न होना भी लिवर के प्रभावित होने के लक्षण होते हैं। नॉन अल्कोहलिक लिवर कैंसर जैसे गंभीर रोग का उदभव फैटी लिवर से ही माना जाता है।
समस्या के कारणों को समझें
फैटी लिवर जैसी स्थिति एकदम से उत्पन्न नहीं होती, बल्कि इसमें वर्षों का समय लगता है। मोटापा, मधुमेह, कोलेस्ट्रॉल का स्तर का बढ़े रहना, भारी तली हुई वस्तुओं का अधिक और लगातार सेवन करना, शारीरिक निष्क्रियता तथा आनुवांशिक प्रवृत्ति इसके मुख्य कारण माने जाते हैं। फैटी लिवर की एक अन्य स्थिति भी है जो अल्कोहल अथवा मद्य के अधिक मात्रा में और लंबे समय तक सेवन करने से उत्पन्न होती है जो कि दु:साध्य होती है।
क्या हैं उपचार के उपाय
कोई भी अनुभवी चिकित्सक रोगी के पेट को दबाकर इसे समस्या के बारे में पता कर सकता है। केवल इसकी ग्रेडिंग जानने के लिए लैब टेस्ट की जरूरत पड़ती है। अल्ट्रासाउंड, फाइब्रोस्कैन तथा रक्त के परीक्षण से फैटी लिवर का भली भांति निदान किया जा सकता है। प्राचीन आयुर्वेद ग्रंथों में फैटी लिवर को ‘यकृतदाल्युदर’ कहा गया है। इसके ग्रेड एक और ग्रेड दो अवस्था को ठीक करना अधिक सुगम है। शुरुआत जीवनशैली को सुधार करने से होती है। दूसरा, वजन कम करना, अल्कोहल का पूर्णतया त्याग, भारी और तली खाद्य वस्तुओं का निषेध तथा सक्रिय जीवनशैली अपनाने जैसे उपाय करने होते हैं। औषधियों के साथ अगर इन उपायों पर गौर किया जाए, तो इस बीमारी से पूरी तरह मुक्ति प्राप्त की जा सकती है।
जानें कुछ आयुर्वेदिक उपाय
आयुर्वेद मनीषियों ने अनेक एकल औषधियों पर अनुसंधान कर लिवर के रोगों का प्रभावशाली उपचार सुनिश्चित किया है। कुटकी, पुनर्नवा, भूमि आमला, कालमेघ, गिलोय, शरपुंखा और भृंगराज जैसी औषधियां फैटी लिवर की प्रशस्त औषधियां मानी जाती हैं। अन्य शास्त्रीय औषधियों में फलत्रिकदि क्वाथ, पुनर्नवादि क्वाथ और त्रिफला मंडूर जैसे योगों का प्रयोग किया जा सकता है। वैद्य रोग की अवस्था जांच कर औषधि की मात्रा तय कर सकते हैं।



